अनसुलझे सवाल


मैं काफी दिनों से यह सोच रहा था कि मेरे जो सवाल हैं उनका जवाब कहां पर मिलेगा और कैसे मिलेगा, एक दिन सुनने में आया कि अमुक स्‍थान पर एक प्रसिद्ध मंदिर है और वहां पर भगवान आते हैं जो किसी इंसान के शरीर में चंद पल रहते हैं और लोगों की पीड़ा हरते हैं। चूंकि मेरे सवाल ही मेरी सबसे बड़ी पीड़ा हैं, इसलिए मैंने सोचा कि अबकी बार ऐसे ही किसी एक स्‍थान पर जाकर लाइन में लग जाउंगा और समय आने पर भगवान से परिचर्चा कर ही लूंगा। जो सवाल हैं, जो टेंशन है, सीधे फेस-टू-फेस उनसे ही परामर्श लूंगा और मार्गदर्शन प्राप्‍त कर लूंगा।


हालांकि पहले मैं मंदिर मस्जिद नहीं जाता था पर इसी खुशी में मैं मंदिर जाने लगा कि रोज-रोज जाउंगा तो उनसे पहचान हो जाएगी और जब मैं उनके दरबार में जाउंगा तो वह यह नहीं सोचेंगे कि यह बन्‍दा कौन है, इसे तो पहले कभी नहीं देखा। मंदिर जाकर प्रार्थना करते समय ही मैं यह समझने लगा कि शायद मेरे सवालों का जवाब जल्‍द ही मिल जाएगा और मैंने एडवांश में ही हर रोज मंदिर जाकर प्रार्थना के रूप में अपने सवालों को भगवान की सेवा में प्रस्‍तुत करना शुरू कर दिया।

मेरे सवाल भगवान को कैसे लगेंगे यह तो पता नहीं लेकिन आसपास के लोग जरूर मुझे बुद्धू समझ रहे थे क्‍योंकि उनके हिसाब से भगवान के दरबार में लोग केवल इसलिए आते हैं कि उनको कार, घर, पैसा या परिवार चाहिए होता है लेकिन मैं तो कुछ अजीब सी प्रार्थना करता हूं, उनसे सवाल करता हूं। कुछ ऐसे सवाल, जिनका जवाब सामाजिक लोगों के पास पहले से ही है। भगवान शायद बिजी रहते हैं और मौखिक प्रार्थना भूल जाते हैं इसलिए मैंने सोचा कि क्‍यों न अपने सवालों को अर्जी की तरह कागज पर लिखकर उनके दरबार में अर्पित करना शुरू दूं। उनके दरबाद में मेरे सवालों की हार्ड कॉपी रहेगी तो सबूत भी होगा कि मैं लाइन में सबसे आगे हूं और वह मुझे पहले सुनेंगे और मेरी शंकाओं का समाधान कर, मुझे कृतार्थ करेंगे। इसी पागलपन में मैंने अपने दिल के अरमानों को कागज पर लिखकर पुष्‍प की भांति भगवान की पार्थिक प्रतिमाओं पर अर्पित करना शुरू कर दिया।

शुरू में तो किसी ने ध्‍यान नहीं दिया, पर हर रोज कागज के ढेर देखकर शायद पुजारी भी ताड़ गया कि यह मेरी करतूत है और वह मुझ पर भड़कने लगा। समझाइश दी गई कि भगवान पर ताजा पुष्‍प अर्पित किए जाते हैं कागज नहीं। पर मेरा पागलपन कहां से कम होता, मुझे तो अपने सवालों के जवाब चाहिए थे सो मैंने मंदिर ही बदल दिया। क्‍योंकि मैंने पढ़ा था कि भगवान तो एक ही है, बस उसके रूप अलग हैं। मंदिर बदल दिया गया और नये जगह पर वही पुराने कारनामे शुरू कर दिये। पर क्‍या फायदा, वहां पर भी कोई जवाब नहीं मिला। भगवान पर अर्पित फूलों के साथ मेरे हार्ड कॉपी के सवाल भी किसी नदी में विसर्जित कर दिए गए। और वो कागज पर लिखे सवाल पानी में मिल गए। लेकिन मेरे सवालों का जवाब आज भी नहीं मिला।

फिर सुना गूगल सारे जवाब देता है तो उसके पीछे हाथ धोकर पड़ गया, लेकिन गूगल में भी वही जवाब मिल रहे थे जो हमारे धर्मग्रंथ में और हमारे समाज द्वारा दिए गए। हां, कुछ और नये जवाब भी मिले, लेकिन उनको वेरिफाई कौन करेगा, कि यही जवाब सच है। जब तक हूं तब तक तो कोशिश करूंगा कि मेरे सवालों का जवाब मिल जाए। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक दिन समय के साथ मैं भी खत्‍म हो जाउंगा और मेरे दिमाग में उथल पुथल मचा रहे सवाल भी मेरे साथ खत्‍म हो जाएंगे, इसलिए इन सवालों को यहां पर लिख रहा हूं ताकि अगर भगवान को वक्‍त मिले या फिर गूगल या भविष्‍य की कोई तकनीक, तो मेरे सवालों का जवाब मिल जाए और जब मैं किसी नये रूप में आउं तो मुझे फिर से इन सवालों का जवाब न खोजना पड़े।

मेरे सवाल –
1. दुनिया में जातिवाद की शुरूआत किस भगवान ने की और यह वर्तमान में क्‍यों जरूरी है ?
2. अगर भगवान सर्वत्र हैं तो फिर किसी एक स्‍थान पर जाकर मन्‍नत क्‍यों मांगते हैं ?
3. जिनके नाम लेने मात्र से लोग माया से मुक्‍त हो जाते हैं, उनसे बात करने के भी लोग माया (घर, परिवार, कार, पैसा आदि) क्‍यों मांगते हैं ?
4. संसार में कौन सा धर्म श्रेष्‍ठ है ? किस धर्म के लोगों को अपने मर्जी से, स्‍वतंत्र रूप से जीने का हक है ?
5. जिन पवित्र स्‍थानों पर चमत्‍कार होते हैं, अप्राकृतिक दृश्‍य दिखते हैं, अलौकिक शक्ति निवास करती हैं, उन पवित्र स्‍थानों पर जाकर भी इंसान की बुद्धि क्‍यों नहीं सुधरती है ?
6. समस्‍त ब्रह्माण्‍ड में लाइन खींचकर सभी धर्म, देश ने अपने अपने परिक्षेत्र बना लिए गए हैं, लेकिन वास्‍तव में इन पर किसका हक है, किसी एक राज्‍य का, किसी एक धर्म का, किसी एक इंसान का या सभी का ?
7. भगवान ने ही भूख बनाई और खाने के लिए कार्वनिक चीजें (जो नष्‍टप्राय: हों), घास, फूल, पत्‍ती और जीव आदि सबमें जान है और इनसे ही भूख मिटती है। तो फिर घास, फूल पत्‍ती खाने वाले पवित्र कैसे और मांस खाने वाले अपवित्र कैसे हुए ?



यों तो बहुत से सवाल हैं पर ये कुछ खास सवाल हैं जिनका उत्‍तर मुझे जल्‍दी चाहिए है। अभी तक तो कुछ मिला नहीं इसलिए उस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार है जब कोई यह खबर देगा कि वहां पर भगवान आए हैं और लोगों की समस्‍या हल कर रहे हैं। मैं जाउंगा सारे सवालों का पिटारा लेकर और मांगूगा विधाता से कुछ मार्गदर्शन,  तब कहीं जाकर मेरे दिल को सुकून मिलेगा और मानसिक शांति।
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