जब इस वास्तविकता को मैंने जाना तो मैंने दो काम किए, पहला - हर समय, हर किसी से प्यार से बोलना और हर मामले को प्यार से सुलझाने की कोशिश करना। और दूसरा - अपने इस वक्त में अपने साथ साथ दूसरों के लिए भी जाना। मुझे पता है कि मेरे पास वक्त उतना ही है। इसे अपने लिए जियूं या अपनों के लिए या सबके लिए या फिर कुछ भी न करूं, यह गुजरता जरूर जाएगा और वापस कभी नहीं आएगा।
इस वक्त को अगर मैं केवल अपने लिए जिया, तो कुछ खास नहीं। पर अगर इसको अपनों के साथ जिया तो मुझे मेरे परिजन याद रखेंगे कि कोई था। लेकिन अगर मैंने इसको अपने साथ सबके लिए जिया तो एक दिन मेरे परिजनों के अलावा कई लोग कहेंगे कि कोई था जिसकी कमी आज भी लगती है। मैंने सोच लिया है कि मैं इसी लम्हे को बेहतरीन तरीके से उपयोग करूंगा और न केवल अपने लिए बल्कि सबके लिए जियूंगा। ताकि मेरा अस्तित्व मेरे बच्चों या मेरी जाति से नहीं बल्कि मेरे नाम और मेरे काम से जाना जाए।
हमारी जिन्दगी में कितना वक्त बचा है यह तो हमें पता नहीं होता लेकिन जो वक्त हमारे पास होता है उसका हम बेहतर तरीके से उपयोग कर सकते हैं और अपने नाम का एक अस्तित्व इस दुनिया में छोड़ सकते हैं। वक्त को गुजरने से नहीं रोका जा सकता और न ही उसके वापिस लाया जा सकता है। बस हमारे हाथ में केवल इतना होता है कि जो वक्त हमें मिला है, उसका बेहतरीन तरीके से उपयोग कर, हम अपना जीवन सफल बना सकते हैं।
