दोस्तों, हम में से हर किसी की जिन्दगी में ऐसा जरूर होता है जब हमारे आसपास के लोग हमारी help करते हैं और हमें बहुत सपोर्ट करते हैं और एक दिन वह भी आता है जब लोग हमें देखते ही नाक भौंह सिकोड़ते हैं। कुछ लोग को दिल में चुभने वाली बात कहने से तक परहेज नहीं करते।
जब समाज के लोग हमारी तारीफ करते हैं, हमारा सपोर्ट करते हैं तो हमें अनायास ही अपने अन्दर एक अजीब सी शक्ति का अहसास होता है और हर दुख की घड़ी भी हमें एक खुशनुमा पल में बदलती दिखती है। हम अकेले होने पर भी खुद को अकेला महसूस नहीं करते हैं। सच कहा जाए तो खुशियां हमारे चहुं ओर बिखरी रहती हैं, ऐसा माहौल निर्मित हो जाता है।
वहीं दूसरी ओर वह वक्त भी हम देखते हैं जब हम चंद लम्हों के लिए असफलता का सामना करते हैं और तब यही तारीफ करने वाले, खुद को हमारा शुभचिंतक बताने वाले हमारे साथ ऐसे पेश आते हैं जिसका वर्णन करना मुश्किल है। कुछ लोग तो हमें देखते नाक—भौंह सिकोड़ते हैं, जैसे हममें से बदबू आ रही हो। कुछ लोग हमें देखते ही अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे कमेंट्स करने लगते हैं जैसे पूरी दुनिया में हम जितना बेकार कोई नहीं है। कुछ लोग तो प्रत्यक्ष रूप से ही दिल में चुभने वाली बात तक कह डालते हैं।
यह सब तो इंसान झेल जाता है पर सबसे अधिक दुख तब होता है जब हमारे अपने जिन पर हमें पूरा भरोसा होता है, जिनके बल पर ही हम जिन्दगी में आगे बढ़ते हैं, वह भी हमारे साथ ऐसे ही पेश आते हैं कि हम बेकार हैं, समय और पैसा बर्बाद कर रहे हैं। सच में दिल टूट जाता है और ऐसा लगता है कि सारी दुनिया खत्म हो गयी है।
दोस्तों, समाज और सोसाइटी के महान लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं हमें इससे प्रभावित नहीं होना चाहिए। चाहे वह हमारी तारीफ करें या हमारी बुराई, क्योंकि अगर हमें इसकी आदत लग जाती है तो फिर हमें बिना मोटिवेशन के आगे बढ़ना नहीं आता।
मैं समाज के ऐसे लोगों से सख्त नफरत करता हूं जो लोगों के अच्छे वक्त में ताली बजाकर उत्साहवर्धन करते हैं और जरा सी असफलता आने पर दिल में गहरे जख्म करने वाले करारे और कर्कश शब्दों का बार करते हैं। ऐसे शब्दों का प्रहार करने से बोलने वालों को तो कुछ नहीं होता है लेकिन मासूम दिल वाले लोगों के दिल, दिमाग पर गहरी चोट पहुंचती है कभी कभार तो यह स्थिति यहां तक पहुंच जाती है कि लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। लानत है ऐसे शुभचिंतकों पर जो दुख में हमारा साथ देने के बजाय हमारे प्रति तीक्ष्ण विष वाले तीर चलाते हैं।
इसके साथ ही मेरा एक सवाल है उन युवाओं से, जो लोगों की बातों में आकर अपनी मेहनत और संघर्ष को भूलकर समाज के विषैले लोगों के तीर से अपनी जीवनी को, अपनी खुशियों को क्षतिग्रस्त करते हैं। क्या आप के दर्द, आपके संघर्ष और मेहनत को उन शुभचिंतकों ने देखा है जो आपने सफलता के लिए की ? क्या आपके संघर्ष के दौरान एक बार भी आपके शुभचिंतकों ने आपसे यह पूछा कि बेटा, कितने घंटे पढ़ते हो, कितने घंटे सोते हो, समय पर खाते हो कि नहीं और अपनी सफलता के लिए कितने अरमानों को दफन कर दिया तुमने ? जब ये लोग हमारे दर्द और संघर्ष को फील किए बिना कोई कमेंट करते हैं तो आप लोग क्यों उसे आसानी से एक्स्पेप्ट कर लेते हैं ? मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या आप लोग भूल जाते हैं कि आपने किस तरह से बसों और ट्रेनों में धक्के खाकर, रात दिन मेहनत करके सफलता के लिए प्रयास किया है। न जाने कितने अरमानों को इसी उम्मीद में खत्म कर दिया है कि बस, आज और .... कल से सब सही होगा।
लोग क्या कहते हैं यह मायने नहीं रखता, मायने यह रखता है कि आप क्या करते हैं। क्या आप लोगों के कहने के जैसे बन गए हैं, क्या आपने कभी ऐसा किया कि घर से पढ़ने के बहाने निकलकर, मूवी देखी हो, कहं बाहर घूम लिया हो या कहीं किसी मित्र के साथ मस्ती कर ली हो। अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो समाज के लोगों के कमेंट्स को नजरअंदाज कीजिए।
यकीन मानिए, आज नहीं तो कल... सब सही होगा। अपने आप पर विश्वास कीजिए। और लगातार मेहनत कीजिए। जल्द ही वह दिन आएगा जब आप सफलता के शिखर पर पहुंच जाएंगे। और सबसे कमाल की बात यही होगी कि जो लोग आज आपके बुरे वक्त में माखौल उड़ा रहे हैं, कल वही लोग आपका पूरा सपोर्ट करेंगे और आपके आसपास नजर आएंगे, आपकी तारीफ करेंगे. इसलिए आज उन लोगों की बातों को नजरअंदाज कीजिए जो आपको अनायास ही दिग्भ्रमित कर रहे हैं या अपने कर्कश और विषेले तीरों से आपके पथ से गिराने का प्रयास कर रहे हैं।
अपनी असफलता के चलते आप भले ही लोगों से नजर न मिला सकें, पर वक्त बदलेगा और एक दिन यही लोग आपसे मिलने के लिए तरस जाएंगे। वक्त बदलेगा बशर्ते कि आप लोगों के बेहूदा कमेंट्स को नजरअंदाज करके आगे बढ़ते जाएं। बस याद रखिए, आप सही हों, कभी ऐसा कुछ मत कीजिए जिससे आप आइने में अपने अक्श से नजर न मिला सकें। अगर आपने ऐसा कुछ किया तो भले ही वक्त के साथ आप सफलता के शिखर पर पहुंच जाएं पर फिर भी आप लोगों से नजर नहीं मिला सकेंगे।
आशा है कि आप मेरी भावना, मेरे मंतव्य को समझ गए होंगे।
