Invisible Love

जब मैंने उसे पहली बार देखा तो ऐसा लग रहा था कि मैं एक सपनों की दुनिया में सफर कर रहा हूं। यूं तो हम स्टेशन पर हजारों की भीड़ में पहली बार मिले थे पर ऐसा लग रहा था कि उस समय इस दुनिया में केवल हम दोनों ही हैं। वो चमकते हुए सितारों सी एक बेहतरीन पोशाक में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। या यूं कहूं कि पहली बार इन आखों ने किसी की खूबसूरती को गौर से निहारा था। वो लम्हा मैं कभी नहीं भूल सकता और न ही भुलाना चाहूंगा। पहली मुलाकात हमारे प्यार का पहला Gift था, जिसमें सब कुछ एक हसीन सपने की तरह था, एक ऐसा सपना जो मैं लगातार देखते रहना चाहता था।

उसके प्यार में डूबने का मजा ही कुछ निराला था। मैं जितना उसको जाना, बस उसका होता गया। ये दीवानापन भी अजीब था ये न तो उसके फिगर से आया था और न ही उसके फेस से, यह दीवानगी तो बस उसकी मासूमियत और परिस्थितियों से जन्म ले उठी थी। दिखने में वह जितनी बच्ची सी थी, दिल से उतनी ही मासूम। हां, यह अलग है कि दिमाग से काफी तेज है वो पर दिल बहुत मासूम है उसका। और यही मासूमियत मुझे लुभा गयी।

मेरी तरह जिद्दी थी और महात्वाकांक्षी भी। जब उसको देखता तो उसमें खुद का प्रतिरूप पाता। बस यही वजह थी कि हर पल उसका होता जाता। उसके एक प्यारे से परिवार में उसका कोई नहीं, ये जानकर उसे गले लगाने का दिल करता था। उस तरफ वो रोती थी तो इस तरफ मैं रोता था। इन्हीं आंसुओं ने मेरे प्यार के पौधे को और बड़ा कर दिया था। मैं उसका इस कदर हुआ कि उसकी खुशी ही मेरा लक्ष्य बन गई। उसकोे कैसे खुशी मिले, मुझे यह तो पता नहीं था पर बस यही मेरा सपना था कि वह अपने अपनों में अपनेपन का रस्वादन कर सके।

कितना प्यारा वक्त था वो जब हम ही एक दूसरे की दुनिया हुआ करते थे। सारी दुनिया से बेखबर। अपने आप में और अपने सपनों की दुनिया में मस्त रहने वाले दो नादान परिन्दे। जब उसे देखता तो सारे नियम, सारे सिद्धांत तोड़कर एक नये आयाम में उसके साथ होता था। हम एक दूसरे की जरूरत नहीं थे पर एक दूसरे के लिए इतने जरूरी थे कि एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं था।

हालांकि मैं कभी मंदिर नहीं गया, पर दिल से दुआ की थी कि उसे वो मिले, जो उसको मिलना चाहिए। मेरी दुआ कबूल हुई या नहीं, ये तो मुझे नहीं पता लेकिन वक्त के साथ उसे वो सब मिला जो उसके लिए मैने सोचा था। अब इतना पता है जो जिन अपनों के पास वह दुखी होती थी, आज उन्हीं के साथ प्यार से हंसती है, मुस्कुराती है और जी भर के खिलखिलाती है। उसकी मुस्कुुराहट मुझे यहां पर भी महसूस होती है। मेरा दिल कहता है कि वह अब बहुत खुश है। इतनी खुश कि शायद अब उसे मेरी जरूरत नहीं। 

''उसे अब मेरी जरूरत नहीं'' मैंने यह इसलिए कहा क्योंकि अब मेरी केयर भी उसको एहसान सी लगती है। एक दुआ और करूंगा उस रब से, कि वो उसको ऐसे ही मुस्कुराहट देते रहें ताकि फिर से वह उदास न हो और फिर उसे किसी के अहसान की जरूरत न पड़े। मैं इस बात से दु:खी नहीं हूं कि वह मुझे भूल रही है बल्कि मैं तो इस बात का जश्न मनाता हूं कि आज वह फिर से मुस्कुराकर अपनी दुनिया में, अपने अपनों के बीच खुशी से रह रही है। 

एक बात तो है उसके आने से पहले मैं केवल खून के रिश्ते मानता था पर अब यह भी मानता हूं कि दिल के रिश्ते भी उतने ही अहम् होते हैं बस उन्हें निभाना सीख जाओ। एक वो वक्त था जब मैं ही उसकी दुनिया था और सिर्फ वो मेरी दुनिया लेकिन उसके अपनों के प्यार ने अब मेरा स्थान ले लिया है और मुझे यकीन है कि वो उसका अच्छे से ख्याल रखेंगे। यही दुआ मैंने रब से मांगी थी, और यही मेरा काम था जो शायद अब पूरा हो चुका है। 

मासूम चेहरे वाली सख्शियत, जिसमें मेरा प्रतिरूप दिखता है, वही मेरा पहल और आखिरी प्यार है। उसका कोई Replacement नहीं है और न ही कभी होगा। मैं हमेशा उसे चाहूंगा। यह शानदार और यादगार वक्त जो उसके साथ मिला, यह मेरे लिए एक तोहफा है, जो हमेशा संभालकर रखूंगा। 

जब याद करता हूं इस कहानी को, तो होंठों पर अनायास ही मुस्कुराहट आ जाती है और याद आती है वो पहली मुलाकात, वो मासूम सा चेहरा, स्टेशन की भीड़ में दो अजनबी एक दूसरे को खोजते हुए.... 

अब चलता हूं, फिर मिलूंगा किसी दिन, किसी नये रूप में, एक नये नाम के साथ। 

— अज्ञात 
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1 Response to "Invisible Love"

  1. plzzx Sir Aap btaiye aapne isme koun si theme use ki hai

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