कायर


मुझे लड़ाई—झगड़े, फालतू की तू—तू, मैं—मैं से सख्त नफरत है। मेरा सीधा—सा सिद्धांत है — ''प्यार से जियो और सुकून से जीने दो।'' अपने इसी सिद्धांत को पूरा करने के लिए मैं हमेशा खामोश रहता हूं क्योंकि मुझे पता है कि आज की दुनिया में लोग छोटी सी बात को भी प्रतिष्ठा प्रश्न बनाकर उसी पर लड़ना शुरू कर देते हैं इसलिए मैं लोगों से ज्यादा बात नहीं करता हूं और जब जरूरत पड़ती है तो केवल काम की बात करता हूं। अगर कोई मुझसे कुछ कहता है तो मैं यह सोचकर भूल जाता हूं कि कौन सी इसके साथ जिन्दगी बितानी है, दो पल साथ रहना है, प्यार से गुजार लो। संक्षेप में कहा जाए तो लोग मेरे सिर पर चढ़कर हो—हल्ला भी करें तो मैं सोचता हूं कि जाने दो, यार। मेरे इसी व्यवहार के कारण कई लोगों को लगता है कि मैं संघर्ष से डरता हूं, कायर हूं, डरपोक हूं। अब मैं उनको कैसे बताउं कि संघर्ष की परिभाषा क्या है। 

लोगों को लगता है कि पढ़ाई हो गयी, ब्याह हो गया और बच्चे हो गए, बस​ जिन्दगी का कोरम पूरा हो गया। इसके बाद उनको फिर कुछ लक्ष्य नजर नहीं आता है तो वे छोटी छोटी बातों में ही उलझे रहना चाहते हैं। जब तक काम है, काम करते हैं फिर गुट बनाकर एक दूसरे की हंसी, बुराई में मग्न हो जाते हैं और इसी दौरान अगर कोई गरमाहट बन गयी तो फिर जीने का एक नया लक्ष्य उनको मिल जाता है। और फिर चलने लगती है टॉम एण्ड जैरी की तरह उनकी भिड़न्त। मुझे इस सब से सख्त नफरत है। अगर आप के पास कोई काम नहीं है तो क्या आप केवल दूसरों की बुराई, लड़ाई ही कर सकते हैं ? कुछ अच्छा कीजिए, यार। 

सच कहा जाए तो एक मायने में, मैं डरपोक ही हूं क्योंकि मैं डरता हूं कि मुझे जो छोटी सी जिन्दगी मिली है वह कहीं दूसरे लोगों की तरह फालतू कामों में न बीत जाए। मैं डरता हूं कि कहीं मेरी सारी ताकत और पैसा अच्छे काम के बजाय केवल तू—तू, मैं—मैं में न लग जाए। और इस बात से भी डरता हूं कि कहीं क्रोध में आकर मैं किसी का अहित न कर दूं और बाद में उसके परिवार को कष्ट उठाना पड़े। इसलिए मैंने इस डर की वजह से खुद से एक वादा किया है कि जब तक हो सकेगा खुद को इन प्रपंचों से दूर रखूंगा। अपनी शक्ति और धन—संपत्ति किसी अच्छे कार्य में लगाउंगा।

मुझे यह तो नहीं पता कि लोगों की नजर संघर्ष की परिभाषा क्या है ? पर मैं इस बात से सख्त नफरत करता हूं कि छोटी सी बात को प्रतिष्ठा प्रश्न बनाकर एक—दूसरे को मार—पीट कर हम अपनी शक्ति, धन—दौलत और समय खराब करते रहें और जब बूढ़े हो जाएं तो एक ग्रुप में बैठकर कहें कि सरकार कुछ करती नहीं हैं। हमारे विकास की योजनाएं नहीं लाती, हम जैसे लाचारों की मदद नहीं करती। मेरी नजर में संघर्ष वह लड़ाई है जिसका कोई मतलब हो। मैं अपनी जिन्दगी को तू—तू, मैं—मैं या छोटी—छोटी लड़ाई में बिताकर लाचार बुढ़ापा नहीं जीना चाहता न ही किसी सरकार को कोसना चाहता हूं और न ही यह चाहता हूं कि मेरे वंशज कभी किसी सरकार से अपने विकास की योजनाओं की अपेक्षा करें। बल्कि मैं चाहता हूं कि मैं अपने लोगों को इतना काबिल बना सकूं कि वे स्वयं दूसरों के लिए एक मददगार बन सकें। सही शब्दों में ''मैं एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीना चाहता हूं''। 

अपने इसी सिद्धांत के लिए मैं लगातार प्रयासरत हूं और छोटी—छोटी बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ता जाता हूं। अब लोग मुझे कायर कहें या डरपोक, यह उनका अपना नजरिया है इस पर मुझे किसी से कोई ऐतराज नहीं है। मैं तो बस अपने तरीके से जिन्दगी जीकर अपनी प्यारी सी दुनिया बनाना चाहता हूं।
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