मेरे दोस्तों और शुभचिंतकों का ऐसा मानना है कि मैं बड़े घराने में शादी करूंगा और अच्छा खासा दहेज लूंगा। पर मैंने तय किया है कि मैं उस लड़की से शादी रचाउंगा जो गरीब परिवार से हो, जिसका कोई न हो। अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैंने एक ऐसी लड़की को पसंद किया जिसके मां—बाप बचपन में गुजर गए थे और उसका कोई नहीं था। पहले उसे कभी देखा नहीं था पर केवल उसकी परिस्थिति ने ही मुझे उसके प्रति आकर्षित किया। मुझे बहुत खुशी थी कि मैं अपने एक सिद्धांत को पूरा करने जा रहा हूं। बड़ी खुशी से पिछले वेलेन्टाइन डे पर अपने परिजनों के साथ उसके घर गया था, जैसी कल्पना की थी ठीक वैसी वह लड़की थी, सब कुछ सही था पर समाज के रीति रिवाज और न जाने किन किन बातों का हवाला देकर दहेज शब्द बीच में घुस ही आया। कीमत इतनी थी कि अनाथ लड़की की तरफ से मिलना मुश्किल था और अपनों की चाहत इतनी थी कि लड़की के लिए उनसे दूर नहीं जा सकता था। परिणाम वो पहली मुलाकात ही आखिरी मुलाकात में बदल गयी।
सही हुआ या गलत, इसी की कश्मकश में डूबा रहने लगा तो लोगों ने मुझे जो तर्क दिए वह वास्तव में सोचने योग्य थे। उनका कहना था कि अगर तुम सर्विस में नहीं होते तो क्या तुमको वह रिश्ता आता, तुम्हें क्या लगता है कि तुम्हारी अच्छाई और आचरण के लिए ही तुम्हारे लिए वह रिश्ता आया था ? नहीं, उस लड़की के शुभचिंतकों को केवल एक सर्विस वाला बन्दा चाहिए था। तुम नहीं, तो कोई और सही पर हर लड़की पक्ष एक अच्छा सर्विसमैन ही चाहेगा। अगर उन्हें केवल अच्छा बन्दा चाहिए तो आचरण और व्यवहार में तुमसे भी अच्छे हैं तुम्हारे भाई, उनके लिए क्यों नहीं कहा ? इन तर्कों से मैं आज तक उबर नहीं पाया हूं और इसी सोच में डूबा हूं कि आखिर इनमें स्वार्थी और लालची कौन है ? वो लड़की पक्ष, जिसने अच्छे लेकिन बेरोजगार युवकों को छोड़कर मुझे ही चुना। या मेरे अपने जिन्होंने समाज के रीति रिवाज और परम्पराओं के अनुसार लड़की पक्ष से मांग की या फिर मैं, जो यह सब देखकर चुपचाप रह गया ? काफी सोच—विचार करने के बाद एक ही तथ्य सामने आया कि हम सब स्वार्थी और लालची हैं। मैंने अपने सिद्धांतरूपी स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए ही उसे पसंद किया था, लड़की पक्ष ने अपने स्वार्थसिद्धि के लिए मुझे पसंद किया और मेरे अपनों ने अपने स्वार्थ के लिए उनसे मांग की।
इस घटना के बाद मेरे दोस्त ने क्या सोचा, मेरे अपनों ने क्या सोचा और सबसे बड़ी बात उस लड़की ने क्या सोचा, यह सब मुझे नहीं पता लेकिन मैंने तय कर लिया है कि तक तक तो किसी और से मुलाकात नहीं करूंगा जब तक इन सब परिस्थितियों को खत्म न कर दूं। इस सब के लिए मुझे काफी पैसा और जिगर चाहिए होगा क्योंकि पैसा रहेगा तो भविष्य में मेरी ओर से मांग नहीं की जाएगी और अगर हुई तो अपने जिगर के दम पर उन सभी सामाजिक परम्पराओं के खिलाफ लड़ सकूंगा, उनके बदल सकूंगा।
