सिद्धांत


इस दुनिया में कई जाति—धर्म एवं संप्रदाय के लोग रहते हैं। दुनिया के सभी जाति धर्म या संप्रदाय इस दुनिया में ठीक उसी प्रकार से सुशोभित होते हैं जैसे बागों में रंग—बिरंगे फूल। पर कुछ लोगों ने जाति या धर्म को बंटवारे का आधार समझ लिया है और इंसानों को इंसानों के खिलाफ भड़काकर, उन्हें लड़ाकर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। जाति—धर्म बंटवारा नहीं है बल्कि सात रंगों की तरह हैं जो अलग—अलग होने पर ही सुन्दर और आकर्षक दिखाई देते हैं। 

आप कल्पना कीजिए कि यदि सातों रंग आपस में मिल जाएं तो क्या वे बेहतर दिखेंगे ? नहीं, न .... ठीक इसी प्रकार से इस दुनिया में जाति—धर्म या संप्रदायों का अस्तित्व है। हर जाति, हर धर्म के अपने अपने सिद्धांत होते हैं। और लोग उन्हें मानने की पूरी कोशिश भी करते हैं। 

'सिद्धांत' यह कोई प्राकृतिक चीज नहीं है बल्कि हम आप जैसे इंसानों द्वारा ही बनाए गए होते हैं। सच कहा जाए तो सिद्धांत किसी एक इंसान द्वारा ही स्वयं के लिए बनाए गए होते हैं और जब कोई उनसे प्रभावित होता है जो उनका अनुसरण करने लगता है और धीरे—धीरे यही अनुसरणकर्ता अनुयायी बन जाते हैं और सिद्धांत धर्म का स्वरूप धारण कर लेता है। देखा जाए तो सिद्धांत एक अच्छे जीवन, अच्छे कल की संकल्पना को लेकर बनाए जाते हैं लेकिन आज हालत यह है कि सिद्धांतों और धर्म की आड़ लेकर लोग मारकाट करने पर उतारू हैं। 

सिद्धांत हों या जाति—धर्म, ये सब हमने इसलिए बनाए ताकि हमारा समाज, हमारी दुनिया सतरंगी लगे पर इसका मतलब यह तो बिल्कुल नहीं निकालना चाहिए कि एक जाति/धर्म के लोग दूसरे लोगों से नफरत करें, उनके प्रति विद्वेष की भावना रखें या उनके समूल नाश की तरफ अग्रसर होते रहें। सातों रंग अलग—अलग शोभा देते हैं पर उनका अलग होना सजा नहीं है न ही यह उनके बीच लड़ाई का आधार होता है। वो तो इसलिए अलग हैं ताकि वे सब मिलकर एक आकर्षक और सुन्दर जहां का निर्माण कर सकें।
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